स्वर्ग नर्क की आस न त्रास ।

Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव

Verse 127 of 131

स्वर्ग नर्क की आस न त्रास । जे रस रसिक बिहारिनि दास॥ - श्री बिहारिन देव - बिहारिन देव जी की वाणी स्वर्ग और नर्क के बीच एक समझौते के रूप में. जे रस रसिक बिहारिणी दास.. - श्री बिहारिन देव - बिहारिन देव जी की आवाज
श्रीकुंजबिहारी सर्वसु सार।ता व्रज के आवरण सुनि गोपी