जोरी अद्भुत आज बनी
Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव
Verse 131 of 131
(राग केदारौ)
जोरी अद्भुत आज बनी। [1]
बारौं कोटि काम नख छबि पर उज्ज्वल उपमा नील मनी॥[2]
उपमा देत सकुचि निरउपमित घन दामिनि लजनी। [3]
करत हास परिहास प्रेम जुत सरस विलास सनी॥[4]
कहा री कहौं लावण्य रूप गुन सोभा सहज घनी। [5]
श्रीबिहारिनदास दुलरावत श्री हरिदास कृपा बरनी॥[6]
- स्वामी श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, रस के पद (123)
(राग केदारौ) जोरि अदभुत अज बानी। [1] भौंहों और छोटे नाखूनों पर चमकीले नीले रत्न की छवि..[2] उपमा दे सकुचि निरुपमित घन दामिनी लाजानि। [3] मैं हास्य, प्रेम, आनंद, खुशी की बात करता हूं... [4] मैं कहता हूं, सुंदरता की सुंदरता, सरल घनी सुंदरता। [5] श्री बिहारिन दास दुलारवत श्री हरिदास कृपा करो.. [6] - स्वामी श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी के वचन, रस के छंद (123)