नामी नाम न भावई
Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव
Verse 130 of 131
व्याकुल बिरह बिहार बिनु, नख सिख लोभी लीन।
श्रीबिहारिनिदास अंग सिथिलई, स्वासनि गिनत अधीन॥
- श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (136)
विरह से व्याकुल, बिहार बिनु, नख सिख लोभी लिन। श्री बिहारिन दास अंग सिथिलै, स्वासानि गिनत अधीन.. - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धांत के मित्र (136)