रसिकवर रसिकनी रस रासि

Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव

Verse 20 of 131

रसिकवर रसिकनी रस रासि। रसिक-सुघर रसिकन की जीवनि, जुगल परस्पर हासि॥ [1] कोक कला संगीत सिरोमनि, अँग अँग लावनि लासि। इहि रस दंपति संपति पर बलि, विसद बिहारिनिदासि॥ [2] - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जू की वाणी, रस के पद (74) रसिकवर रसिकानि रस रसि। रसिका-सुघर रसिकन की जीवनी, जुगल संपदार हसि.. [1] कोक कला संगीत सिरोमनि, अंग अंग लावणी लसी। इस युगल की संपत्ति पर बलिदान, विसद बिहारिनिदसी, [2] - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जू की वाणी, रास के छंद (74)
अष्ट सिद्धि, नव निद्धि मुक्ति पद दें बौरावत दीख। बारक श्रीहरिदास विलोकत