बारक श्रीहरिदास विलोकत
Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव
Verse 21 of 131
(सवैया)
बारक श्रीहरिदास विलोकत, तेल की बूँद समुद्र तरी। [1]
बादि करै श्रम साधन कोटिक, पंक में ढारि भरी गगरी॥ [2]
न तुलै करुनालय लाडिली कौ बल, लालहि लै अनुराग ढरी। [3]
श्रीबिहारिनिदासि ह्वै सेय तिन्हैं, जिनि दंपति संपति साँचि धरी॥ [4]
- श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धांत के कवित्त-सवैया (76)
(सवैया) बराक श्रीहरिदास विलोकत, समुद्र में तेल की बूंद। [1]. [3].