जब तें प्रभुहिं नवायो माथ।

Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव

Verse 33 of 131

जब तें प्रभुहिं नवायो माथ। तव तें सुखही में सुख दीनों लीनों गहि हरि हाथ॥ [1] आज्ञाहीन दीन भयौ पै तज्यौ न स्वामी साथ। श्रीबिहारिदास चेरे सों राख्यौ सहज सनेही नाथ॥ [2] - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धांत के पद (129) जब तेन प्रभुहिं नवयो गणित। तव तेन सुखाहि मन सुखा दिनो गह हरि हाथ..[1] अज्यहिं दीन भयौ पै तज्यौ न स्वामी साथ। श्री बिहारीदास चेरे पुत्र राख्यौ सहज सनेही नाथ.. [2] - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी के वचन, सिद्धांत (129)
नामी नाम न भावईनामी नाम न भावई