नामी नाम न भावई
Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव
Verse 37 of 131
अति टोंडिकु अति चिकनियाँ, अधिक चतुर इतराइ।
कितहि विभौ कित ठकुरई, जूठनि कौं ललचाई॥
- श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (139)
बहुत तोंदिकु, बहुत चिकनी, बहुत चतुर इतराई। कितने विभौ, कितने ठकुराई, जुठानी, कौन लोभी.. - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धांत के मित्र (139)