सब ही संत हैं रस भरे

Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव

Verse 38 of 131

कृपा मैं जानी अब ब्रज भूप। लीनौं हरि गहि बाहु महाबल रति संश्रित भै कूप॥ [1] मिटि गये पाप संताप ताप तन चितवत स्याम सरूप। श्रीबिहारीदास गुन कहै कहाँ लौं उपमा अमित अनूप॥ [2] - श्री बिहारिन देव जु, सिद्धान्त के पद (141) अब बताओ ब्रज भूप। लिणौं हरि गहि बहु महाबल रति संश्रित भाई कूप।।[1] पाप, पाप, प्रायश्चित, शरीर की चिंता स्याम के समान है। श्री बिहारीदास गुन कहि कहि लौं उपमा अमित अनुप.. [2] - श्री बिहारिन देव जू, सिद्धांत पाद (141)
नामी नाम न भावईनामी नाम न भावई