रसिकवर रसिकनी रस रासि
Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव
Verse 49 of 131
श्रीबिहारनिदास लडावत त्यौं त्यौं, अलकलडे लडकांहि। [1]
उमा रमा को सची सरस्वती, ब्रजजुवती ललचांहि॥ [2]
तिनको दरस देव दुर्ल्लभ जे, आराधा राधांहि। [3]
भुव बसि वृन्दावन नहिं सेवत, ते प्रानी पछितांहि॥ [4]
- श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जू की वाणी, रस के पद (169)
बिहारनिदास जी, यह ऐसी लड़ाई है, अलकालदे लड़कन्ही। [1] उमा राम साक्षात सरस्वती हैं, ब्रज्जुवती लोभी नहीं हैं। [2] तिनो दरस देव दुर्लभ जे, आराध्या राधनहिं। [3] प्रभु वृन्दावन में रहते हैं और सेवा नहीं करते, जीव बेचैन हैं। [4] - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जू की वाणी, रस के छंद (169)