नामी नाम न भावई

Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव

Verse 57 of 131

श्रीबिहारीदास संतोष गहि, बैठयौ सिखर सुमेरु। सूझे श्रीहरिदास तें, ऊँचे नीचे ढ़ेर॥ - श्री बिहारिन देव - बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (216) श्रीबिहारीदास सन्तोष गाही, बैठयौ शिखर सुमेरु। सूझे श्री हरिदास दस, ऊंच नीच धार.. - श्री बिहारिन देव - सिद्धांत मित्र बिहारिन देव जी की वाणी (216)
नामी नाम न भावईनामी नाम न भावई