नामी नाम न भावई

Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव

Verse 56 of 131

श्री बिहारीदास हरिदास कौ, संतत सुखद विहार। कर्मठ फाटै चैंथरा, गाँठि बाँधि अंगार॥ - श्री बिहारिन देव - बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (215) श्री बिहारीदास हरिदास कौ, संत सुखद विहार। कर्मठ फतई चंथरा, गन्ति बंधी अंगार.. - श्री बिहारिन देव - बिहारिन देव जी की आवाज, सिद्धांत के मित्र (215)
नामी नाम न भावईनामी नाम न भावई