नामी नाम न भावई
Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव
Verse 67 of 131
काम न आवै कौन हूँ, अति अपरस आचार।
अंत निबाहै प्रेम हीं, छाँडे खाट कौ द्वार॥
- श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (364)
मैं कौन हूं, कम नहीं? बहुत अलग व्यवहार. प्रेम का अंत नहीं, दान की शय्या कहां.. - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी के वचन, सिद्धांत मित्र (364)