नामी नाम न भावई

Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव

Verse 66 of 131

भक्ति साधारन जगत में, हरि कीनों सिष्टाचार। श्रीबिहारीदास हरिदास कै, इक रस वैस बिहार॥ - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (362) भक्त तो साधारण मनुष्य है, हरि कीनो तो सदाचारी है। श्री बिहारीदास हरिदास काई, एक रस वैस बिहार.. - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धांत के मित्र (362)
नामी नाम न भावईनामी नाम न भावई