मेरे गति ब्रजपति कैं ब्रजवासी

Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव

Verse 7 of 131

बांके विरदनि विदित बिहारी। [1] इच्छा-विग्रह धरि लीला वपु, सब अवतारनि के अवतारी। लक्ष्मीपति ब्रजपति कों दुर्लभ, उनसे कौन बड़ौ अधिकारी॥ [2] नित्य किसोर निरन्तर बिहरत, सेवत श्री हरिदास दुलारी। ऐंडिल ऐंडाइल अरुन कमल बांके विरदनि विदित बिहारी॥ [3] - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धांत के कवित्त-सवैया (28) बांके विरदानी विदित बिहारी। [1] लीला वपु, इच्छा-विग्रह का अवतार, सभी अवतारों का अवतार। लक्ष्मीपति ब्रजपति, जो दुर्लभ, जो उनसे भी बड़ा अधिकारी.. [2] नित्य किशोर निरंतर बिहार, सेवत श्री हरिदास दुलारी। अरुण कमल बने एंडिल और विदित बिहारी ने दिया आशीर्वाद.. [3] - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की आवाज, सिद्धांत की काव्य-सवैया (28)
उद्धव आदि ब्रह्मादिक दुर्लभरहैं अंग संग अनंग हरैं मनु