मेरे गति ब्रजपति कैं ब्रजवासी

Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव

Verse 78 of 131

वृन्दावन रस भूमि यह, पेंड पेंड पर भेद। खारौं मीठौ मरमरौ, यहै समुझि भ्रम छेद॥ - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (502) वृन्दावन रस भूमि यः, पेंड पेंड पार भेद। खरौं मिठौ मरमरौ, यह माया का छेद.. - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की आवाज, सिद्धांत के मित्र (502)
मेरे गति ब्रजपति कैं ब्रजवासीनामी नाम न भावई