नामी नाम न भावई
Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव
Verse 79 of 131
नाम रूप विन गुन कहा, केसर कुसुम कसूँभ।
श्रीबिहारीदास बिनही कसैं, दोऊ दीसैं ऊंभ॥
- श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (504)
नाम रूप विन गुन कहा, केसर कुसुम कसुम्भ। श्री बिहारीदास बिनाही कसाईं, दोउ दिसैं उनाभा.. - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धांत की साखी (504) गुण के बिना परख का नाम और रूप एक ही है, जिसका स्वरूप समझ में नहीं आता, जैसे केसर और कुसुम के फूल बिना डंठल के एक जैसे लगते हैं। (अर्थात नाम और रूप की पूजा करते समय गुणों का भी ध्यान रखना चाहिए)