नामी नाम न भावई

Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव

Verse 81 of 131

जेतो अन्तर बास में, तेतौ जानि उपास। श्रीबिहारीदास कछु साँच है, कछु कछु लोभ लिबास॥ - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (603) जेतो अंतर बस मैं, तेतौ जानि उपास। श्री बिहारीदास, कुछ हैं साँचे, कुछ हैं लोभी वस्त्र.. - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सखा सिद्धांत (603)
मेरे गति ब्रजपति कैं ब्रजवासीनामी नाम न भावई