मेरे गति ब्रजपति कैं ब्रजवासी

Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव

Verse 80 of 131

जो करै भजन में अंतरौ, तासौं करि बैराग। समिलित साधन श्रम बढै, घटै सबै अनुराग॥ - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (565) भजन में जो भी करो, भजन में ही लग जाओ, उससे विरक्त मत हो जाओ। संयुक्त साधन श्रम बढ़े, घटे सब स्नेह.. - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी के वचन, सिद्धांत के मित्र (565)
नामी नाम न भावईनामी नाम न भावई