मेरे गति ब्रजपति कैं ब्रजवासी

Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव

Verse 83 of 131

काहूँ कैं बल बाँह कौ, काहू शिष्य पचास। इक हथिया हरिदास कौ, नाँउँ बिहारीदास॥ - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (642) मुझे बल और भुजा क्यों कहना चाहिए? मैं क्या कह सकता हूँ, शिष्य पचास? एक हथिया हरिदास कौ, नानुम बिहारीदास.. - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धांत के मित्र (642)
नामी नाम न भावईनामी नाम न भावई