नामी नाम न भावई
Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव
Verse 84 of 131
ते अनन्य निजु जान, जे श्रीस्वामी हरिदास के।
मनें न आने आन, विनु निकुँज रस माधुरी॥
- श्री बिहारिन देव, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (655)
दूसरा निजु जन जे श्रीस्वामी हरिदास का है। मनेन न अने अन, विणु निकुंज रस मधुरी.. - श्री बिहारिन देव, श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धांत के मित्र (655)