साधन श्रम न कछु किये न कछु करने जोग

Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव

Verse 94 of 131

एक आस एक वास करि, एकै इष्ट उपास। श्रीबिहारीदास अनन्य मत, बड़ौ भजन विस्वास॥ - श्री बिहारिन देव, बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (598) एक होकर जियो, एक ईश्वर की आराधना करो। श्री बिहारीदास अन्य विचार, बादू भजन मान्यताएँ.. - श्री बिहारिन देव, बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धांत के मित्र (598)
राधेजू मेरौ जनम सुधारौ।मोतिन के बोरे नहीं हंसन की नहि पांत