मेरे विषै विसन वर वाम

Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव

Verse 98 of 131

जै श्रीवृन्दावन घन नव निकुंज में संतत बिराजत जोरी। अति अगाध महिमा रस जिनकौ सो पैयत इक कृपा किसोरी॥ सुक नारद से भक्त मुक्त सनकादिक सुहृदनि हूँ तें चोरी। श्रीबिहारीदास जस कहैं कहाँ लौं रसना सहस तऊ मति थोरी। - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की बानी, सिद्धान्त के पद (152) जय श्री वृन्दावन, घन नव निकुंज में संतत बिराजत जोरी। मैं उस लड़की की बेटी हूं जिसमें अपार महिमा और अपार महिमा का सार है। जैसे ही श्रीबिहारीदास कहते हैं कि मैं रसना सहस कहां से लाऊं, आपकी हिम्मत नहीं हुई। - श्री बिहारिन देव जी, श्री बिहारिन देव जी की बानी, सिद्धांत के श्लोक (152)
जै श्रीवृन्दावन नव निकुंज में संतत सहज बिराजत जोरी ।राधेजू मेरौ जनम सुधारौ।