जै श्रीवृन्दावन नव निकुंज में संतत सहज बिराजत जोरी ।

Biharin Dev Vani — श्री बिहारिन देव

Verse 97 of 131

जै श्रीवृन्दावन नव निकुंज में संतत सहज बिराजत जोरी । अति अगाध महिमा रस जिनको सो पीवत इक कृपा किसोरी ॥ - श्री बिहारिन देव - श्री बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की पद (152) जय श्री वृन्दावन, नव निकुंज पुरुष सदैव सुखपूर्वक निवास करते हैं। अपार महिमा का रस, प्रेम का रस, ऐसी पवित्र, धन्य लड़की.. - श्री बिहारिन देव - श्री बिहारिन देव जी के शब्द, सिद्धांत और श्लोक (152)
नामी नाम न भावईमेरे विषै विसन वर वाम