केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं
Braj Binod — श्री लाल बलबीर
Verse 12 of 77
जे मन मोहन लाड़ले, मोहे सुर मुनि वृंद।
सो छवि लखि मोहित रहे, श्री वृंदावन चंद॥
- श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, श्री वृंदावन शतक (6)
जे मन मोहन लाडले, मोहे सुर मुनि वृन्द। सो छवि लखि मोहित रहे, श्री वृन्दावन छन्द.. - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, श्री वृन्दावन शतक (6)