केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं

Braj Binod — श्री लाल बलबीर

Verse 13 of 77

(कवित्त) कोमल कमल हू सों गहरे गुलाबन सों, ललित रसाल पत्र आभा के हरन हैं। [1] लाल हैं गुलाल गुंज हिंगुर सिंदुर बिंब, ये कहा बिचारे रंक समता करन हैं॥ [2] 'लाल बलबीर' उर करत बिचार चारु, उपमा हजारन की सुषमा दरन हैं। [3] रसिक जनन धन ये ही हैं अगिन सर्व, आनंद करन राधारानी के चरन हैं॥ [4] - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, श्री राधा शतक (06) (कविता) मैं कोमल कमल हूं, मेरा बेटा गहरा गुलाब है, मेरे सुंदर, रसीले अक्षर प्रतिभा के अपहरणकर्ता हैं। [1] लाल हैं गुलाल गुंज हिंगुर सिन्दूर बिनब, ये कहां पूरा रंग समता करन है.. [2] 'लाल बलबीर' उर करत बिचार चारु, उपमा हजारन की सुषमा दरन। [3] रसिक जनन धन, येहि अगिन सर्वा, आनंद करण राधारानी के चरण हैं.. [4] - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, श्री राधा शतक (06)
केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौंकेकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं