केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं
Braj Binod — श्री लाल बलबीर
Verse 21 of 77
यह छबि टरत न उर तें टारी।
नवल कुंज में राजत पिय सँग श्री वृषभान कुमारी॥ [1]
मंडित बदन गुलाल लाल सों सुखमा बढ़ी अपारी।
चरन टहल में राखौ स्वामिनि दासी मोहि बिचारी॥ [2]
- श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, वन विहार वर्णन (10)
या छवि तारत न उर तेन तारी। नवल कुंज में रजत पिया के साथ श्री वृषभान कुमारी.. [1] दुबला शरीर गुलाल लाल पुत्र सुखमा बधाई अपारी। अपनी स्वामिनी की दासी मोहि बिचारि को तलहटी में राखो। [2] - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, वन विहार विवरण (10)