केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं

Braj Binod — श्री लाल बलबीर

Verse 22 of 77

श्रीबनराज निकुंज में, पिय प्यारी सुख दैन। षटऋतु सहचरी बपु धरे, सेवत हैं दिन रैन॥ - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, होरी के कवित्त (11) श्री बनराज निकुंज पुरुष, प्रिय सुख दाता। शत्रु के साथी हैं बापू, सेवा है दिन-रात.. - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, होरी की कविताएँ (11)
केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौंकेकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं