केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं
Braj Binod — श्री लाल बलबीर
Verse 24 of 77
आवैं दौर दौर दारा द्वार महारानी जू के,
रूप कौं निहारैं प्रान बारैं विमला सी हैं। [1]
रती सी गिरा सी गिरजा सी सुखरासी आसी,
रंभा सी रमा सी कर जोरत दमा सी हैं॥ [2]
आई सिरमौर बासी जेती लोक लोकन की,
'लाल बलबीर' कोटि ससि सी प्रकासी हैं। [3]
पासी हैं न कोऊ सम सुखमा अपार राजैं,
सब में अधिक एक राधे रूप रासी हैं॥ [4]
- श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, श्री राधा शतक (14)
और रानी के दरवाजे के हर छेद से मुझे विमला का निर्जीव रूप दिखाई देता है. [1] ज्यों रति गिरि, सुखरासि असि, रम्भा जस राम, जोरत जस दामा.. [2] हे जगत के स्वामी, 'लाल बलबीर' एक जगमगाता प्रकाश है। [3] पासी हैं कू सम सुख अपार राजैन, सब मनद आधी एक राधे रूप रसी.. [4] - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, श्री राधा शतक (14)