केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं

Braj Binod — श्री लाल बलबीर

Verse 25 of 77

हृदै सरोवर प्रेमजल, तुम पद हद अरविन्द। मन मिलिंद चाहत प्रिये, सदा सदा मकरन्द॥ - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, श्री वृंदावन शतक (14) हृदय सरोवर प्रेमजाल, तुम शब्द थे अरविन्द। दिल चाहता है तुम्हें प्रिय, सदा मधुर.. - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, श्री वृन्दावन शतक (14)
केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौंकेकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं