केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं
Braj Binod — श्री लाल बलबीर
Verse 27 of 77
श्रीराधे नंदलाल की, चरण रेणु सिरधार।
चित चाहे कारज सरैं, करैं सकल अघ छार॥
- श्री लाल बलबीर, ब्रज विनोद, शिख नख वर्णन (14)
श्रीराधे नन्दलाल के चरणों में, रेनू सिरधर। चित चाहे कारज सरैन, करैं सकल अघ छार.. - श्री लाल बलबीर, ब्रज विनोद, शिख नख विवरण (14)