केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं

Braj Binod — श्री लाल बलबीर

Verse 29 of 77

(कवित्त) जाकौं नेत नेत कहि वेदन बखान्यौ, ईश ध्यान में न आनौं अचरज सुखदानी है। [1] और कौन पावै मति शारदा की सकुचावै, याके देखिबे कौं कमला सी ललचानी हैं॥ [2] 'लाल बलबीर' भुज मेलि करें केलि दोऊ, हिये सुख झेल सेवें सखी गुनखानी हैं। [3] चौधेहु भुवन परयंत थाने जाने यहाँ, स्यामा-स्याम राजा बनराज राजधानी हैं॥ [4] - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, श्री वृंदावन शतक (17) (कविता) जाकौन नेत नेत कहि वेदं बखानयौ, ईश ध्यान पुरुष एन आनन आनन अचरज सुखद है। [1] शारदा की माटी और कौन पा सकता है, देखो कमल सा ललचाता कौन है... [2] 'लाल बलबीर' ने भुजाएं लहराने को दी हैं, उसके सात सखा सुख सहने वाले हैं। [3] चौधेहु भुवन परायंत थाना, जानिए यहां स्याम-स्याम राजा बनराज की राजधानी.. [4] - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, श्री वृन्दावन शतक (17)
केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौंकेकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं