केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं
Braj Binod — श्री लाल बलबीर
Verse 36 of 77
(कवित्त)
बड़े बड़े मुनी ज्ञानी वास हेत ललचानी मती,
वेदहू नें नेत नेत कह गायौ है। [1]
मोहन के प्यारे भारे ध्यान धर धर हारे,
तिनहूँ कौ याकौ ना प्रभाव दरसायौ है॥ [2]
'लाल बलबीर' राजधानी श्रीकिशोरी जू की,
चौधेहू भुवन में अखण्ड तेज छायौ है। [3]
राधिका की दासी सुखरासी जौलों होय नहीं,
तौलो बनराज जू कौ कौने रस पायो है॥ [4]
- श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, श्री वृंदावन शतक (25)
(कविता) महान संतों ने कहा है, 'लालचनि मति, वेदाहु नेन नेट नेट फॉर ग्यान। [1] मोहन का प्रेम प्रबल है, तिन्हु कौ याकौ न प्रभाव दरसयु है। [2] 'रेड बलबीर' राजधानी श्री किशोरी चिड़ियाघर के चौदेहु भुवन में एक अक्षुण्ण सफेद पक्षी है। [3] राधा दासी सुखरासी सुखी नहीं, मत तोलो बनराज, क्या रस पाया है.. [4] - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, श्री वृन्दावन शतक (25)