केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं
Braj Binod — श्री लाल बलबीर
Verse 37 of 77
कीजिय ये दृढ़ चित्त में, तज दारा सुत वित्त।
कहैं लालबलबीर जू, बस वृंदावन नित्त॥
- श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, वृंदावन अष्टक (26)
ऐसा करो द्रधा चित्त पुरुष, तज दारा सुत विट। कहै लालबलबीर जू, बस वृन्दावन नित्ता.. - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, वृन्दावन अष्टक (26)