केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं

Braj Binod — श्री लाल बलबीर

Verse 41 of 77

आयौ कर संतन की संगत में बार बार, सदाँ पद पंकज में सीस कौं नवायौ कर। [1] न्हायौ कर प्यारे मारतण्ड तनया में जाय, रज कों लगाय अंग अंग हुलसायौ कर॥ [2] पायौ कर प्रभु के प्रसाद को प्रसन्न है कैं, नेम वनराज जू की परिक्रमा जायौ कर। [3] लायौ कर ध्यान मन मगन होय हृदै बीच, बैठकँ निकुंजन में राधा गुन गायौ कर॥ [4] - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, श्री वृंदावन शतक (41) अपने बच्चों के साथ बार-बार आओ, तुम्हें पंकज के घर में बैठने के लिए कौन कहेगा। [1] नहा लो मेरे प्रिय मार्तंड तनय में जय, राज कोण लागे अंग अंग हुलासयौ दो.. [2] क्या तुम प्रभु का प्रसाद पी सकते हो, जाकर वनराज जू के नाम की परिक्रमा कर सकते हो। [3] मन प्रसन्न होता है ध्यान करने से, सभाओं में राधा के गुण गाने से.. [4] - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, श्री वृन्दावन शतक (41)
केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौंकेकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं