केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं
Braj Binod — श्री लाल बलबीर
Verse 42 of 77
(कवित्त)
अब तौ बदनाम भई आली ब्रज मण्डल में,
लाज गुरु लोगन की खो गई सुखो गई। [1]
ननद जिठानी सतरानी इतरानी रहीं,
सासु कटु॒ बात कहे सो गई सु सो गई॥ [2]
भनें बलबीर हम नीति ना अनीत जानें,
प्रेम रूपी बेलि यह बो गई सु बो गई। [3]
सामरी सलौनी छबि कैसें के बिसारी जाय,
दासी मन मोहन की हो गई सु हो गई॥ [4]
- श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, प्रेम पचासा (42)
(कविता) अब तो भाई अली ब्रज मंडल में बदनाम हो गए, गुरु लोगों की लाज़ सूख गई। [1] ननद सतराणी इटराणी रहिन, सास कड़वी बात कहती है, सो गाती है, सो गाती है.. [2] ननद बलबीर, हम नीति नहीं जानते, यह प्रेम का पेट ऐसा गाता है, वैसा गाता है। [3] The image of Samari Saloni became that of farmer Bisari Jai and maid Man Mohan. [4] - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, प्रेम पचासा (42)