केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं
Braj Binod — श्री लाल बलबीर
Verse 43 of 77
(कवित्त)
स्वामिनी जू भामिनी जू हंस कल गामिनी जू,
कोटि द्युति दामिनी जू पीउ चितचोरी जू। [1]
लाल संग रमनी जू केलि रस कमनी जू,
छबि कंज बदनी जू सर्व तन गोरी जू॥ [2]
सखी सभा मंडनी रसिक लाल बंदनी,
अनन्द रस कन्दनी चतुरी और भोरी जू। [3]
'लाल बलबीर' दासी तोरी सरन सुखरासी,
रखिये सदैव पासी कीरति किसोरी जू॥ [4]
- श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, श्री राधा शतक (41)
(कविता) स्वामिनी जु भामिनी जू हंस काल गामिनी जू, कोटि द्युति दामिनी जू पिउ चितचौरि जू। [1] लाल संग रमणी जू केली रस कामनि जू, छबि कंज बदनी जू सर्वा तन गोरी जू.. [2] सखी सभा मंदाणी रसिक लाल बंदाणी, आनंद रस कंदाणी चतुरी और भोरी जू। [3] 'लाल बलबीर' दासी तोरी सरन सुखरासी, राखिये सदायव पासि किरति किसोरी जु.. [4] - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, श्री राधा शतक (41)