केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं
Braj Binod — श्री लाल बलबीर
Verse 49 of 77
किसोरी राधे विनती करों करजोर।
कीजै दया दयानिधि नागरि
राखौ चरनन ओर॥ [1]
द्वारे परी दीन हौं टेरत
अब ना बनै मुख मोर।
दासी जान न टार विपुन तें
छवि निरखों निसिभोर॥ [2]
- श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, श्री वृंदावन शतक (56)
किसोरी राधे कृपा करो करजोर। किजै दया दयानिधि नागरी राखौ चरणन य.. [1] द्वार पर परी दिवस है, अब मुख में मोर नहीं। दासि जन नटार विपुन्तेन छवि निरखो निसिभोर.. [2] - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, श्री वृन्दावन शतक (56)