केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं

Braj Binod — श्री लाल बलबीर

Verse 50 of 77

श्रीराधा मोरी एक अरज चित लावौ। तुम सरबज्ञ सुजान सिरोमणि करुणासिंधु कहावौ॥ [1] और न कोउ हितू मो जग में जाके पास भ्रमावो। दासी दीन परी द्वारे पै श्रीबनराज बसावौ॥ [2] - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, श्री वृंदावन शतक (57) श्रीराधा मोरी एक अरज चित लावौ। तुम सर्बजन्य सुजान सिरोमनि करुणासिंधु कहावौ.. [1] और न कोउ हितु मो जग में जेके पस भ्रमवो। दासी दीन परी के द्वार श्री बनराज बसावौ। [2] - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, श्री वृन्दावन सेंचुरीज़ (57)
केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौंकेकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं