केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं
Braj Binod — श्री लाल बलबीर
Verse 51 of 77
दीजै मौकों श्रीवृन्दावन बास।
कुमर किसोरी गोरी भोरी करुनानिधि सुख रास॥ [1]
सैन बैन रस दैन जुगल वर लखौ परसपर हास।
दासी दीन परी द्वारे पै पूजौ मन की आस॥ [2]
- श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, श्री वृंदावन शतक (60)
बस एक मौका तो दो, श्री वृन्दावन। कुमार किसोरी गोरी भोरी करुणानिधि सुख रस.. [1] साईं बैन रस दैण जुगल वर लखौ एक दूसरे पर हँसे। दासी दिवस परी द्वार पूजा, मन की आस.. [2] - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, श्री वृन्दावन शतक (60)