केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं
Braj Binod — श्री लाल बलबीर
Verse 52 of 77
(कवित्त)
जाके पद नेति नेति बंदत सुरेस सेस,
तेरे पद सीस नाय ठाड़े कर जोरी री। [1]
जेतौ नट नागर तू नागरी छबीली बाल,
कहा प्रतिपाल भई ऐसी मत भोरी री॥ [2]
'लाल बलबीर' मिल दोऊ रस रंग कीजै,
दीजै सुख नैनन कौं मानि बिनै मोरी री। [3]
रही रैन थोरी अब सैन करौ गोरी,
कुञ्ज प्रीतम के संग मिलि कीरति किसोरी री॥ [4]
- श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, श्री राधा शतक (60)
(कविता) जेके पद नेति नेति बंदत सुरे सेस, तेरे पद से नै ठाड़े कर जोरी री। [1] जेतौ नट नागर, तू नगरी छबीली बल, बोले प्रतिपाल भाई, ऐसा मत करो भोरी री.. [2] 'लाल बलबीर' मुझको रस दो, सुख दो, नैनन से सुख दो, कौन जाने। [3] रेन थोरी अब एक गोरी लड़की है, कुंज प्रीतम के साथ एक खुश लड़की है.. [4] - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, श्री राधा शतक (60)