केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं
Braj Binod — श्री लाल बलबीर
Verse 6 of 77
करत इन्हीं कौ ध्यान ईस सनकादिक से,
रटौं जस संत केते झाँझ लै करन है। [1]
हिये हरषाते सिरनाते आय धाय धाय,
कहत इही जी कल कंटक हरन हैं॥ [2]
लाड़िले रसिक छैल लाड़िली दयानिधि ये,
लाल नंदलाल हिये धीरज धरन हैं। [3]
दास चित्त आलै हैं करत हैं निहालैं हालै,
सदाँ ही दयालै राधे तेरे चरन हैं॥ [4]
- श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, चरण वर्णन (2)
इस समय उन पर कौन ध्यान देता है, जैसे कोई संत झांझ पर ध्यान देता है? [1] जीवन के अंत में व्याकुल हूं, यही कहता हूं, कांटों को हटाता हूं.. [2] ये लड़ाके हैं, प्रेमी हैं, लड़ाके हैं, दयानिधि हैं, लाल नंदलाल हैं, ये हैं धैर्य का दामन थामने वाले। [3] दास चित्त अलै हैं कर्ता है निहालैं हलै, सदन ही दयालै हैं राधे तेरे चरण हैं.. [4] - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, चरण वर्षण (2)