केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं

Braj Binod — श्री लाल बलबीर

Verse 7 of 77

मेरे श्रीराधारमन, अति सरूप सुकमार। कोटि कोटि रति काम छबि, इन पर डारूँ बार॥ - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, षड्ऋतु शतक, दोहा (2) मेरे श्रीराधारमन्, अति सुन्दर सुकमार। कोटि कामुक छवियाँ, उन पर भयंकर बोझ.. - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, षड्रितु शतक, दोहा (2)
केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौंकेकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं