केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं
Braj Binod — श्री लाल बलबीर
Verse 61 of 77
छबीली रंगीली रस आगरी किसोरी गोरी,
राख निज ओरी मति मोरी यह धीजिये। [1]
नागरी उजागरी जू सदां रूप आगरी जू,
'लाल बलबीर' दया दासन पर कीजिए॥ [2]
कीरति दुलारी मनमोहन की प्राण प्यारी,
करूँ मनुहारी बिनै एती सुन लीजिये। [3]
मेरी यह आस पूरी कीजै सुखरास सदां,
हिय में हुलास बास वृन्दावन दीजिये॥ [4]
- श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, वृन्दावन शतक (87)
छबीली रंगली रस अगरी किसोरी गोरी, राख निज ओरी मति मोरी धीजिए। [1] नागरी उजगारी जू सदन रूप अगारी जू, 'लाल बलबीर' दया दासन पर करि... [2] कीर्ति दुलारी मनमोहन की प्रियतमा, बिनु अति सुनि करुण मनुहारी। [3] सुखरस सदन, मेरी यह इच्छा पूरी करो, बस मुझे वृन्दावन दे दो.. [4] - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, वृन्दावन शतक (87)