केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं
Braj Binod — श्री लाल बलबीर
Verse 62 of 77
(कवित्त)
छाँड़ जग जालन के ख्याल तें रँगीले हाल,
जाकी लै सरन जहाँ काहु के न डर हैं। [1]
दारा तात जननी सजाती जात जेते जान,
तेते जान घाती सिद्ध कारज हरन हैं॥ [2]
दास कहैं चेत दयासिन्धु तें लगाय हेत,
रहिये निकेत अघ दल के दरन हैं। [3]
धीरज धरन हारे ऐसे ना निहारे जैसे,
तारन तरन राधारानी के चरन हैं॥ [4]
- श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, श्री राधा शतक (90)
(कविता) चंदा जगन जालान के ख्याल तेन रंगीले हाल, जाकी ला सरन जहां काहू के ना डर हैं। [1]. [3] धीरज धरन हरे, चरणों को ऐसे मत देखो जैसे ये राधारानी के चरण हैं.. [4] - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, श्री राधा शतक (90)