केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं
Braj Binod — श्री लाल बलबीर
Verse 67 of 77
भूमिलोक सुरलोक सब, रहे पताल लजाय।
कुमरि माधुरी अंग की, समता दीजे काय॥
- श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, नख सिख दर्शन (4)
भूमिलोक, सुरलोक, सरललोक, पाताललोक लज्जित रहते हैं। कुमारी माधुरी अंग की, समता दीजे काय.. - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, नख सिख दर्शन (4)