केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं

Braj Binod — श्री लाल बलबीर

Verse 69 of 77

(कवित्त) दीन दुख हरनी तू वेदन में वरनी तू, आनन्द की करनी दरनी यम फाँसनी। [1] दास जन तारन तू सोक गन गारन तू, दुष्ट दल मारन पूजैया जन आसनी॥ [2] बलबीर करता तू घट घट बरता तू, सुभ काज सरता तू हरता हिरासनी। [3] सदां सुखरासनी तू संपत्ति प्रकासनी मो, पातक बिनास राधे वृन्दावन बासनी॥ [4] - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद (कविता) दीन दुख हरणी तू वेद पुरुष वरानी तू, आनंद की करनी डारानी यम फसानि। [1]. [3] सदन सुखरासानि तू स्नपत्ति प्रकाशनि मो, पटक बिनास राधे वृन्दावन बसनि.. [4] - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोदा
केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौंकेकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं