केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं

Braj Binod — श्री लाल बलबीर

Verse 8 of 77

श्री वृषभानु कुमारि, परम उदार कृपाल तुम। दासी मोहि बिचारि, टहल महल की दीजिये॥ - श्री लाल बलबीर जी, ब्रज बिनोद, श्रीराधा शतक (2) श्री वृषभानु कुमारी, आप अत्यंत उदार और दयालु हैं। दासी मोहि बिचारि, महल में सैर कराओ.. - श्री लाल बलबीर जी, ब्रज बिनोद, श्री राधा शतक (2)
केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौंकेकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं