केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं
Braj Binod — श्री लाल बलबीर
Verse 71 of 77
(कवित्त)
केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं,
कूक कूक नाच नाच सुजस सुनाऊँ मैं। [1]
लता द्रुम बेली रंगरेली जो करौ तौ करौ,
रावरे ही अंगन पै पुष्प-झर लाऊँ मैं॥ [2]
जो पै रज-रेनुका बनावौ मन भायौ ये ही,
तौ पै पद पंकजन सीस पै धराऊँ मैं। [3]
ये ही बर पाऊँ ललचाऊँ सुख साधे राधे,
बास दे निकुंजन को तेरौ ही कहाऊँ मैं॥ [4]
- श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, राधा शतक (110)
(कविता) केकी जो बनावै तौ बनायौ बनराज जू कौन, कुक कुक नच नच सुजस सुनौं मैं। [1] लता ढोल बेली रंगरेली जो करे, मैं अपने आंगन में फूल और झरने लाऊंगी.. [2] चरण-रज को रिझाऊं, तो पंकजन के चरण पकड़ लूं. [3] यही वह समय है जब मैं तुम्हारे लिए खुशियाँ लाऊंगा, बस निकुंजन को दे दो, मैं तुम्हें ही बुलाऊंगा.. [4] - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, राधा शतक (110)