केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं

Braj Binod — श्री लाल बलबीर

Verse 72 of 77

(कवित्त) कोऊ कहै मोहि सदां बल है भवानी जू कौ, भाषत अनूप बानी बिमल बिकासनी। [1] कोऊ कहै मोहि सदां बल मात काली जू कौ, कारज करत जन खलन बिनासनी॥ [2] कोऊ कहै मोहि सदां बल रहे गंग जू कौ, भोजन करत अघ पूजै जन आसनी। [3] ‘लाल बलबीर' कौं भरोसौ रहे येही सदां, मेरे कुल पुज्ज राधे वृन्दावन बासनी॥ [4] - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद (कविता) क्वो कहै मोहि सदन बल है भवानी जू कौ, भाषत अनूप बानी बिमल बिकासनि। [1] आप कैसे कह सकते हैं कि आपके घर में बिजली काली नहीं है, लोग आपके बिना कुछ नहीं करेंगे.. [2] आप कैसे कह सकते हैं कि आपके घर में बिजली काली हो सकती है, और आप बिना वजह लोगों की पूजा करेंगे। [3] 'लाल बलबीर' इस घर का भरोसा कौन करे, मेरा परिवार पूजा करता है राधे वृन्दावन बासनी.. [4] - श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोदा
केकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौंकेकी जो बनावै तौ बनैयौ बनराज जू कौं