कीच लगी ब्रज खिरक की
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 104 of 229
कर मुरली लकुटी गहे, घूँघरवारे केश।
यह बानिक नयनन बसो, श्याम मनोहर वेश॥
- ब्रज के दोहे
कर मुरली लकुटि गाहे, घुँघराले बाल। यम बनिक नयनन बसो, श्याम मनोहर वेश.. -ब्रज के दोहे
Braj Ke Dohe — ब्रज के दोहे
Verse 104 of 229